ईरान संघर्ष पर अल-क़ायदा की चुप्पी क्यों? रणनीति या मजबूरी

Zantro News Prime
April 21, 2026 • 08:59 AM

📰 ईरान संघर्ष पर अल-क़ायदा की चुप्पी: रणनीति, दबाव और अंदरूनी दुविधा के संकेत
मध्य पूर्व में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर ऐसे बड़े संघर्षों पर प्रतिक्रिया देने वाला यह संगठन इस बार सार्वजनिक रूप से बेहद सीमित नजर आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुप्पी सामान्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि अल-क़ायदा का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल ऐसी स्थिति में है जहां उसे हर बयान के संभावित असर को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, संगठन के कुछ प्रमुख नेता लंबे समय से ईरान में मौजूद हैं। ऐसे में अल-क़ायदा खुलकर कोई ऐसा बयान देने से बच सकता है जिससे ईरान नाराज़ हो या उनके ठिकानों पर खतरा बढ़े।
दूसरी ओर, संगठन अमेरिका और इसराइल के खिलाफ भी खुलकर बयान देने से परहेज कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करने पर उसे ईरान के अप्रत्यक्ष समर्थन के रूप में देखा जा सकता है, जिससे उसके समर्थकों के बीच नकारात्मक संदेश जा सकता है।
कट्टरपंथी विचारधारा में ईरान की भूमिका को लेकर पहले से ही मतभेद रहे हैं, और यही वजह है कि कई अन्य चरमपंथी गुट इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। कुछ गुटों ने अपने समर्थकों को किसी भी पक्ष में खुलकर शामिल होने से बचने की सलाह दी है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इससे पहले भी क्षेत्र में हुए संघर्षों के दौरान अल-क़ायदा ने इसी तरह की चुप्पी बनाए रखी थी। इसके विपरीत, उसका प्रतिद्वंद्वी संगठन इस्लामिक स्टेट ऐसे मामलों में अधिक आक्रामक रुख अपनाता रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में अल-क़ायदा की यह रणनीति उसकी कमजोर होती स्थिति, बदलती प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय समीकरणों को दर्शाती है।

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