Zatro News Prime

टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में 15 साल में भारी तबाही, सैटेलाइट-ड्रोन जांच में पेड़ों की कटाई का खुलासा

टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में 15 साल में भारी तबाही, सैटेलाइट-ड्रोन जांच में पेड़ों की कटाई का खुलासा

### 📰 **टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का खुलासा, सैटेलाइट और ड्रोन जांच में सामने आई हकीकत**

**रायपुर, 24 अप्रैल 2026।** छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पर्यावरण और वन संरक्षण को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। राज्य के वन विभाग द्वारा कराई गई जांच में यह पता चला है कि एक संरक्षित टाइगर रिजर्व के कोर इलाके में पिछले कई वर्षों से अवैध अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई लगातार जारी थी।

जांच में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन सर्वे का उपयोग किया गया। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि करीब 15 साल के भीतर लगभग 106 हेक्टेयर क्षेत्र में जंगल को नुकसान पहुंचाया गया और बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अतिक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता गया। शुरुआती वर्षों में इसका दायरा सीमित था, लेकिन समय के साथ यह कई गुना बढ़ गया। पुराने रिकॉर्ड और हालिया तस्वीरों की तुलना से साफ हुआ कि पहले जहां घना जंगल था, वहां अब खेती या खाली जमीन नजर आ रही है।

ड्रोन सर्वे के दौरान ली गई उच्च गुणवत्ता की तस्वीरों में यह भी देखा गया कि कई स्थानों पर पेड़ों के ठूंठ अब भी मौजूद हैं, जिससे यह पुष्टि होती है कि वहां व्यवस्थित तरीके से कटाई की गई। जांच में यह भी संकेत मिले कि पेड़ों को सीधे काटने के बजाय पहले उन्हें सुखाने के तरीके अपनाए गए, ताकि बाद में जमीन का उपयोग किया जा सके।

वन विभाग ने बताया कि इस मामले में कई लोगों की पहचान की गई है, जिन पर अवैध कब्जा करने और वन संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यह पूरा क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का हिस्सा है, जो राज्य के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ और हाथी जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में जंगल की इस तरह की क्षति का सीधा असर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब जंगलों का दायरा कम होता है, तो वन्यजीवों के रहने और भोजन की व्यवस्था प्रभावित होती है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं, जो ग्रामीण इलाकों के लिए खतरा बन जाती हैं।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संबंधित कानूनों के तहत दोष सिद्ध होने पर जेल की सजा और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। साथ ही अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों की जांच भी की जा सकती है।

अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के बाद प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वनीकरण (reforestation) की योजना बनाई गई है। इसके तहत बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा और जल संरक्षण के उपाय भी किए जाएंगे, ताकि इलाके की पारिस्थितिकी को फिर से संतुलित किया जा सके।

पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग ने अतिक्रमण के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं, जिनके तहत बड़ी संख्या में अवैध कब्जे हटाए गए और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। इन कार्रवाइयों के बाद कुछ इलाकों में वन्यजीवों की गतिविधियों में सुधार देखा गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जंगलों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए न केवल अवैध गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है, बल्कि सटीक प्रमाण भी जुटाए जा रहे हैं, जिससे कार्रवाई को मजबूत आधार मिल रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और कड़ी नजर रखने की योजना बनाई जा रही है, ताकि जंगलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

written_by

Zantro News Prime

Member of our news editorial team, bringing you the latest updates and investigative stories from across the globe.

- जाहिरात -

तुमच्यासाठी शिफारस

चर्चा(0)

तुमचे विचार शेअर करा. सर्व टिप्पण्या प्रकाशनापूर्वी तपासल्या जातात.

टिप्पणी द्या

ईमेल प्रकाशित केला जाणार नाही.

अजून कोणतीही टिप्पणी नाही. पहिले व्हा!

Install News App for better experience?